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Friday, 16 December 2016

गौ माता


गौ माता 
हम सभी निर्णय करे की
-सभी संत पुजारी अपने आश्रम मन्दिर में गौमाता अवश्य रखें।
-बिना गौमाता के घी, गोबर, गौमूत्र, गौदुग्ध के बिना कोई भी पूजा पाठ हवन नहीं करवाएगें।
-भगवान को भोग गौमाता के दूध में बनी मिठाई का ही लगाएगें।
-दीपक सिर्फ गौमाता के घी के ही जलायेंगे।
-बिना गौदान के विवाह सम्पन्न नहीं करवायेंगे।
-घर में गौमाता के दूध, घी, छाछ का ही उपयोग करेगें कोल्ड्रिंक के स्थान पर छाछ पीयेंगें।
-चाय के स्थान पर गौमाता का दूध ही पियेगें क्योंकि चाय गौहत्या को बढावा देती है।
-अपनी नजदीकी गौशाला का घास और दलीये से सहयोग करेंगे।
-अपने पूजा स्थल और प्रतिष्ठान में दान पेटी रखकर हर रोज गौरक्षा हेतु 1 रूपया डालेंगे।
-प्लास्टिक की थेलियों का उपयोग नहीं करेगें, अगर प्लास्टिक दिखे तो जला या दफना कर नष्ट कर देंगे।
-गौरक्षा विषय को कभी भी राजनीति व साम्प्रदायिक विषय नही बनाएंगे क्योकि यह राष्ट्रीय विषय है-
गौरक्षा-राष्ट्र रक्षा, गौहत्या-राष्ट्र हत्या है
-जन्मोत्सव गौशाला में जाकर ही मनाएगें।महामहिमामयी गौ हमारी माता है उनकी बड़ी ही महिमा है वह सभी प्रकार से पूज्य है गौमाता की रक्षा और सेवा से बढकर कोई दूसरा महान पुण्य नहीं है।

१. गौमाता को कभी भूलकर भी भैस बकरी आदि पशुओ की भाति साधारण नहीं समझना चाहिये गौ के शरीर में “३३ कोटि देवी देवताओ” का वास होता है. गौमाता श्री कृष्ण की परमराध्या है, वे भाव सागर से पार लगाने वाली है।

२. गौ को अपने घर में रखकर तन-मन-धन से सेवा करनी चाहिये, ऐसा कहा गया है जो तन-मन-धन से गौ की सेवा करता है तो गौ उसकी सारी मनोकामनाएँ पूरी करती है।

३. प्रातः काल उठते ही श्री भगवत्स्मरण करने के पश्चात यदि सबसे पहले गौमाता के दर्शन करने को मिल जाये तो इसे अपना सौभाग्य मानना चाहिये।

४. यदि रास्ते में गौ आती हुई दिखे, तो उसे अपने दाहिने से जाने देना चाहिये।

५. जो गौ माता को मारता है, और सताता है, या किसी भी प्रकार का कष्ट देता है, उसकी २१ पीढियाँ नर्क में जाती है।

६. गौ के सामने कभी पैर करके बैठना या सोना नहीं चाहिये, न ही उनके ऊपर कभी थूकना चाहिये, जो ऐसा करता है वो महान पाप का भागी बनता है।

७. गौ माता को घर पर रखकर कभी भूखी प्यासी नहीं रखना चाहिये न ही गर्मी में धूप में बाँधना चाहिये ठण्ड में सर्दी में नहीं बाँधना चाहिये जो गाय को भूखी प्यासी रखता है उसका कभी श्रेय नहीं होता।

८. नित्य प्रति भोजन बनाते समय सबसे पहले गाय के लिए रोटी बनानी चाहिये गौग्रास निकालना चाहिये गौ ग्रास का बड़ा महत्व है।

९. गौओ के लिए चरणी बनानी चाहिये, और नित्य प्रति पवित्र ताजा ठंडा जल भरना चाहिये, ऐसा करने से मनुष्य की “२१ पीढियाँ” तर जाती है।

१०. गाय उसी ब्राह्मण को दान देना चाहिये, जो वास्तव में गाय को पाले, और गाय की रक्षा सेवा करे, यवनों को और कसाई को न बेचे अनाधिकारी को गाय दान देने से घोर पाप लगता है।

११. गाय को कभी भी भूलकर अपनी जूठन नहीं खिलानी चाहिये, गाय साक्षात् जगदम्बा है।
            इन्ही शब्दों के साथ
                जय गौ माता की 
            भारत माता की जय