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Tuesday, 11 June 2019

सारी सृष्टि में केवल दो प्राणियों के देह गाय मानव

सारी सृष्टि में केवल दो ही प्राणियों के देह ऐसे हैं जिनमे पूरे तैंतीस कोटी प्राण निवास करते हैं- गाय और मानव

मानव को कर्म स्वातंत्र्य होने के कारण वह उन प्राणों का साक्षात्कार कर अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिये उनका प्रयोग कर सकता है इसी के लिये गौमाता का पूजन व सान्निध्य अत्यन्त उपयोगी है इस विज्ञान के कारण ही गाय को समस्त देवताओं के निवास के रूप में पूजा जाता है सभी धार्मिक अनुष्ठानों में गाय के पंचगव्यों का महत्व होता है गोबर से लिपी भूमि, दूध, दही, घी से बना प्रसाद, गौमूत्र का सिंचन तथा गौमाता का पूजन पूरे तैंतीस कोटि प्राणों को जागृत कर पूजास्थल को मानव के सर्वोच्च आध्यात्मिक उत्थान की प्रयोगशाला बना देता है गायों की प्रचूरता के कारण ही भारतभूमि यज्ञभूमि बनी है आज हमने गायों को दुर्लक्षित कर दिया है इसी कारण देश के प्राणों पर बन पड़ी है गाय के सान्निध्य मात्र से ही मनुष्य प्राणवान बन जाता है आज हमारे शहरी जीवन से हमने गाय को कोसों दूर कर दिया है परिणाम स्पष्ट है मानवता त्राही-त्राही कर रही है और दानवता सर्वत्र हावी है । आज मानव के स्वयं के कल्याण हेतु, विश्व की रक्षा हेतु, पर्यावरण के बचाव के लिये तथा समग्र, अक्षय विकास के लिये गाय के संवर्धन की नितान्त आवश्यकता है गौ-विज्ञान को पुन: जागृत कर जन -जन में प्रचारित करने की अनिवार्यता है गोचर भूमि के संरक्षण के माध्यम से कटती गायों को बचाने के उपक्रम तो आपात्कालीन उपाय के रूप में करने ही होंगे किन्तु गौ आधारित संस्कृति के विकास के लिये गौ-केन्द्रित जीवन पद्धति को विकसित करना होगा प्रत्येक घर में गाय का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है गाय के सान्निध्य मात्र से ही जीवन शरीर, मन, बुद्धि के साथ ही आध्यात्मिक स्तर पर पवित्र व शुद्ध हो जायेगा प्रतिदिन कटती लाखों गायों के अभिशाप से बचने के लिये शासन पर दबाव डालकर गौ-हत्या बंदी करवाने का प्रयास तो आवश्यक है ही किन्तु उससे भी बडी आवश्यकता है प्रत्येक के दैनिक जीवन में गाय प्रमुख अंग हो घर घर में गौ पालन हो अपने हाथ से गौसेवा करने का सौभाग्य हर परिवार को प्राप्त हो प्रत्यक्ष जिनके भाग्य में यह गौसेवा नहीं वे रोज गौमाता का दर्शन तो करें मन ही मन पूजन, प्रार्थना करें व प्रतिदिन अपनी आय का कुछ भाग इस हेतु दान करें किसी ना किसी रूप में गाय हमारे प्रतिदिन के चिंतन, मनन व कार्य का हिस्सा बनें यही मानवता की रक्षा का एकमात्र उपाय है ।